रवि रंजन कुमार महेंद्र Midiahaus Bihar Gopalganj=गोपालगंज में इंजीनियरिंग छात्र से पूछताछ, पीआर बॉन्ड पर रिहाई
गोपालगंज।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) की संयुक्त टीम ने गोपालगंज जिले में छापेमारी कर एक इंजीनियरिंग छात्र को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जांच के बाद किसी भी आतंकी
या देशविरोधी गतिविधि से जुड़ा ठोस प्रमाण नहीं मिलने पर छात्र को पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया।
सुरक्षा एजेंसियों की टीम ने जिले के सिधवलिया प्रखंड के बिसुनपुरा बाजार इलाके में शुक्रवार से ही डेरा डाल रखा था। रविवार को टीम ने पंडितपुर निवासी 20 वर्षी
-
य इंजीनियरिंग छात्र को हिरासत में लिया। छात्र की पहचान फिरोज के रूप में हुई है। सुरक्षा एजेंसियों को तकनीकी जांच के दौरान यह जानकारी मिली थी कि छात्र का मोबाइल नंबर WhatsApp पर सक्रिय एक ऐसे ग्रुप से जुड़ा हुआ है, जिसके कुछ सदस्य पाकिस्तान से जुड़े बताए जा रहे थे।
- व्यस्त रहता है और स्थानीय स्तर पर उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
सदर एसडीपीओ राजेश कुमार ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पूरी जांच की गई है। उन्होंने कहा कि “पूछताछ के बाद किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या देशविरोधी गतिविधि में संलिप्तता के ठोस साक्ष्यनहीं मिले हैं। इसलिए युवक को पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया है।”
इस कार्रवाई के बाद इलाके में दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा। हालांकि प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल जांच के उद्देश्य से की गई थी और मामले पर आगे भी निगरानी रखी जाएगी। बता दे कि भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने सदन में यह मुद्दा उठाया था 168 पाकिस्तानी टूरिस्ट वीजा पर गोपालगंज आए थे उनकी गतिविधियों की जांच की मांग की थी
सूत्रों के अनुसार, इस इनपुट के आधार पर एजेंसियों ने इलाके में कई दिनों तक गुप्त निगरानी की और छात्र की
-
गतिविधियों की जांच की। रविवार को पूछताछ के लिए हिरासत में लेने के बाद छात्र के मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया अकाउंट की गहन जांच की गई। जांच टीम ने छात्र के संपर्कों, चैट हिस्ट्री और ऑनलाइन गतिविधियों को कई एंगल से खंगाला।
पूछताछ के दौरान छात्र ने बताया कि वह एक ऑनलाइन टेक्निकल ग्रुप का हिस्सा था, जहां विभिन्न देशों के लोग टेक्नोलॉजी और पढ़ाई से जुड़े विषयों पर चर्चा करते थे। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि छात्र की किसी संदिग्ध संगठन से प्रत्यक्ष संबद्धता का कोई प्रमाण नहीं मिला है। एजेंसियों ने यह भी पाया कि वह नियमित रूप से अपनी पढ़ाई में

