रवि रंजन कुमार महेंद्र Midiahaus Bihar gopalganj=तमिलनाडु से गोपालगंज पहुंचा विश्व का सबसे बड़ा एकल पत्थर से निर्मित शिवलिंग, श्रद्धालुओं में भारी उत्साह
भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु से उत्तर भारत तक आस्था और शिल्प कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। तमिलनाडु के चैंगलपट्टू जिले के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकड्डु गांव से लगभग 2000 से 2300 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर एक विशालकाय शिवलिंग बिहार के गोपालगंज जिले में पहुंच चुका है। यह शिवलिंग अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, जहां इसे बिहार के मोतिहारी स्थित नवनिर्मित विराट रामायण मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।सुरक्षित और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न कराई जा रही है।
इस ऐतिहासिक और धार्मिक कार्य की अगुवाई धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य सयान कुणाल कर रहे हैं, जो प्रख्यात धर्मविद एवं न्यास परिषद से जुड़े किशोर कुणाल के पुत्र हैं। उनके मार्गदर्शन में यह पूरी यात्रा विधिवत,
उल्लेखनीय है कि महाबलीपुरम का पट्टीकड्डु गांव सातवीं शताब्दी के पल्लव वंश के काल से ही पत्थर तराशने की अद्वितीय कला के लिए विश्व प्रसिद्ध रहा है। इसी परंपरा को जीवंत करते हुए इस शिवलिंग का निर्माण दक्षिण भारतीय शिल्प कला शैली में किया गया है। इसे प्रसिद्ध शिल्पकार लोकनाथ द्वारा तैयार
यह शिवलिंग अपनी भव्यता और विशेषताओं के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब 33 फीट ऊंचा, 210 मीट्रिक टन वजनी यह शिवलिंग ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है और इसे विश्व का सबसे बड़ा एकल पत्थर से बना शिवलिंग माना जा रहा है। इसके
निर्माण में लगभग 10 वर्षों का समय लगा है और कुल लागत करीब 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसे 96 पहिया विशेष ट्रक के माध्यम से ले जाया जा रहा है।
फिलहाल शिवलिंग गोपालगंज पहुंच चुका है, जहां 5 जनवरी को प्रातः 11 बजे विधिवत पूजा-अर्चना का कार्यक्रम निर्धारित है।
शिवलिंग के आगमन से गोपालगंज सहित पूरे बिहार में श्रद्धा,
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उत्साह और भक्ति का माहौल बना हुआ है।
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महादेव

