छिड़कने के विरोध में पुतला दहन

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Midia house Bihar Gopalganj=उत्क्रमित मध्य विद्यालय दुबौली में छेड़खानी के विरोध में धरना–प्रदर्शन, स्थानीय शिक्षकों के तबादले की उठी मांग

उत्क्रमित मध्य विद्यालय दुबौली में मंगलवार को ग्रामीणों और अभिभावकों ने जोरदार धरना–प्रदर्शन किया।

स्कूल प्रांगण में

  • इकट्ठा हुए लोगों ने हाल ही में सामने आए छेड़खानी के मामले पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए दोषी शिक्षक के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दो दिन पहले विद्यालय की ही एक बच्ची के साथ एक शिक्षक द्वारा छेड़छाड़ की घटना ने पूरे क्षेत्र को दहलाकर रख दिया है। इस घटना के बाद अभिभावकों में गहरा आक्रोश और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।

    प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि स्थानीय शिक्षकों का व्यवहार लंबे समय से संतोषजनक नहीं रहा है। अभिभावकों का कहना है कि कुछ शिक्षकों के कारण विद्यालय का वातावरण लगातार प्रभावित हो रहा था, लेकिन गंभीर घटना सामने आने के बाद अब स्थिति पूरी तरह असहनीय हो गई है। इसी कारण ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्यालय में तैनात सभी स्थानीय शिक्षकों का तत्काल तबादला किसी दूरस्थ विद्यालय में किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    आक्रोशित ग्रामीणों ने

      स्कूल प्रांगण में आरोपी शिक्षक का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई और स्टाफ की पुनर्संरचना नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से भी अपील की कि वह

        मामले का संज्ञान लेकर विद्यालय में सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षिक माहौल सुनिश्चित करे।

        अभिभावकों ने यह भी कहा कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। उनका प्रश्न था कि यदि स्कूल ही सुरक्षित

      नहीं रहेगा, तो बच्चों की पढ़ाई–लिखाई और भविष्य दोनों खतरे

      में पड़ जाएंगे। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कदम उठाने, दोषी शिक्षक को निलंबित करने और उस पर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

      विद्यालय प्रबंधन की ओर से बताया गया कि मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में दे दिया गया है और जांच शुरू हो गई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि

        दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी तथा विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

        ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सुरक्षित शिक्षा के अधिकार के लिए है। उनका कहना है कि बच्चों का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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