मोतिहारी में ‘स्वर्ण युग’: एसपी के खौफ से माफिया पस्त, पैरवी करने पहुंचे जनप्रतिनिधि को पुलिस ने भेजा जेल
मोतिहारी। कहते हैं जब नेतृत्व मजबूत और ईमानदार हो, तो व्यवस्था खुद-ब-खुद मजबूत हो जाती है। मोतिहारी पुलिस में यह कहावत पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। जिले की कमान संभालने के बाद से ही पुलिस कप्तान स्वर्ण प्रभात ने साफ संदेश दे दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं—न माफिया, न सफेदपोश और न ही कोई जनप्रतिनिधि। उनके सख्त और निष्पक्ष रवैये से अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है।
एसपी स्वर्ण प्रभात के आते ही जिले में अपराध और अपराधियों के खिलाफ अभियान तेज हुआ है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण चर्चित राजद प्रत्याशी देवा गुप्ता पर की गई कार्रवाई है। वर्षों से अपराध की दुनिया में सक्रिय देवा गुप्ता पर पहले भी कई बार सवाल उठे, लेकिन प्रभाव और रसूख के चलते कार्रवाई नहीं हो पाती थी। स्वर्ण प्रभात ने उसे जिले के कुख्यात अपराधियों की सूची में शीर्ष पर रखा और कानून का ऐसा शिकंजा कसा कि वह मोतिहारी छोड़कर फरार होने को मजबूर हो गया। यह कार्रवाई बाकी अपराधियों के लिए कड़ा संदेश बन गई।
इसी सख्ती का ताजा उदाहरण पिपरा थाना में देखने को मिला। शराब के नशे में हत्या के एक मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। आरोपी को बचाने के लिए विशुनपुरा पंचायत के पंचायत समिति सदस्य मनीष कुमार थाने पहुंचे और पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन उन्हें शायद यह अंदाजा नहीं था कि यहां ‘पैरवी’ का कोई महत्व नहीं। एसपी के स्पष्ट निर्देशों के तहत थानेदार ने बिना देर किए जनप्रतिनिधि को ही गिरफ्तार कर लिया, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद मोतिहारी की जनता में साफ संदेश गया है कि अपराधियों की ढाल बनने वालों को भी अब बख्शा नहीं जाएगा। एसपी स्वर्ण प्रभात की कार्यशैली से आम लोगों में पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ा है, वहीं अपराधियों और उन्हें संरक्षण देने वाले सफेदपोशों में डर का माहौल है। मोतिहारी में अब सिर्फ कानून का राज चल रहा
Bihar Motihari पिपरा थाने में पैरवी के लिए पहुंचे जन प्रतिनिधि एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर भेजे गए जेल

